कार्य होगे साकार करे पितरो का सत्कार

एक बार पुन: मै पितृ दोष के समंध मे बताने जा रहा हू | यह दोष ऐसा है की यदि किसी जातक की कुंडली मे पितृदोष हो तो वह चाहे कितना जतन कर ले कितनी ही भगवान सकारात्मक उर्जा देते है परन्तु जो दोष है उसका उपाय तो आपको करना है की यदि जातक की कुण्डली मे राजयोग जैसे गजकेसरी , बुधादित्य , लक्ष्मीनारायण , पंचमहापुरुष वगेरह है और पितृदोष विधमान है तो पूर्ण राजयोग का फल प्रप्त नहीं होगा और जातक अकारण ही संघर्ष करता रहता है जब पितरो के लिए उपाय करबाए गय तो उन जातको को असाधारण परिणाम देखने को प्राप्त हुए |

पितृदोष का कारण : पितृदोष का केवल एकमात्र कारण है पितरो दोवरा अपने समय मे किये गए गलत कार्य या यू कहे की यदि कुटुंब मे किसी की अचानक म्रत्यु हो जाए और उसका पुत्र पिण्डदान , तर्पण , श्राद , वगेरह न करे और उस पुत्र का भी अचानक देहांत हो जाए और उसका पुत्र भी ये उपरोक्त कर्म न करे तो आगे आने वाली संतानों की कुण्डली मे पित्रदोष आ जायेगा |

नोट : पित्रदोष ज्यदातर तीसरी पीढ़ी मे मैंने देखा है एक विशेष बात यह है की यह अनवरत लगातार चलता रहता है और कुटुंब मे अचानक मृत्यु बदती जाती है |

पितृदोष -१. जातक का जन्म अमावस्या का हो |

2. सूर्य + चन्द्र – अमावस्या

३. सूर्य + शनि

४. सूर्य + केतु

५. चन्द्र + राहू

६. चन्द्र + शनि

७. चन्द्र + केतु

८. सूर्य + चन्द्र + राहु + शनि

९. सूर्य + चन्द्र + केतु + शनि

१०. सूर्य + चन्द्र + राहु

उपरोक्त मे से कोई सा भी योग किसी जातक की कुण्डली मे हो तो पित्रदोष मन जायेगा | कुण्डली मे दुतिये , चतुर्थ , अष्टम , नवम , द्वादश स्थान मे होने से यह योग सर्वाधिक कस्ट दायक होता है | तिर्क भावो मे यह योग अधिक कष्टकर और दुर्गाटनाओ को बदने बाला होता है अनावश्यक यात्रा भ्रमण व् व्यर्ध वाद – विवाद मे फसा देता है | और मानसिक आपदा का कारण बनता है|

पितृदोष के परिणाम – पित्रदोष के परिणाम स्वरूप जातक को सदेव या कभी – कभी अचानक ही बड़ी परेशानी का सामना करना पड़ता है. उसे कभी भी मेहनत का पूर्ण फल प्राप्त नहीं होता है जब उसे लगता है की उसका कोई अति विशेष महेत्व्पूर्ण कार्य पूरा होने वाला है तभी अचानक कोई न कोई बाधा आ जाती है यह योग असफलता का घोतक है जातक तो यश प्राप्त नहीं होता तथा मन-सम्मान मे सदेव कमी होती रहती है जीवन मे दुख , असफलता , ग्रह क्लेश , परिवार या कुटुंब मे अचानक म्रत्यु . किसी का मानसिक विछिप्त होना , वच्चो की पड़ी मे वादा आना आदि दुष्परिणाम वर्तमान मे स्पस्ट दिख रहे है .

पितृदोष के उपाए –

१. गाय को रोटी घी लगाकर साथ मे गुड रखकर प्रतिदिन खिलाये |

२. छत पर पंछियो को दाना डाले व् पिने के लिए पानी रखे |

३. छत पर दही + शक्कर रखे |

४. चीटियो को पंजरी खिलाये|

५. पितरो के लिए गर मे एक स्थान बनाये तथा प्रत्येक मांगलिक व् शुभ कार्य के समाये उन्हें यद् करे | भोग व् दीपक लगाये त्यौहार पर उन्हें अवश्य स्मरण करे |

६. श्राद पक्ष मे पितरो को जल तर्पण करे |

७. पितृदोष की शांति करवाए | यह शांति गया विद्वान ब्रहामन से करवाए |

८. श्राद्ध पक्ष मे गंगा किनारे पितरो की शांति व् हवं करवाए |

९. त्रिशक्ति लोकिट धारण करे. तथा घर मे शुभ महूर्त मे बन्धनमुक्ति यंत्र अवश्य लगाये |

10. बंदरो को फल खिलाये|

मेरे गुरु जी दोवारा बताया गया है की पिंडदान और तर्पण से पितरो को शांति प्राप्त होती है परन्तु पितृदोष समाप्त नहीं होता है | हां यह अवश्यम्भावी है की यदि गाय और कुत्ते को प्रतिदिन रोटी और मीठा खिलाया जाए तो इसका प्रभाव कम होता है और जातक का संघर्ष समाप्त हो जाता है उसे उसके कार्यो मे सफलता प्राप्त होती है |