मनोकामना पूर्ण करती है माँ सिध्दिदात्री

माँ दुर्गा जी की नोवी शक्ति का नाम सिध्दिदात्री है यह सभी प्रकार के सिध्दियो को ल\देने वाली है मार्कन्डेय पुराण के अनुसार अडीमा ,महिमा,गरिमा ,लघिमा प्राप्ती , प्राकाम्य , स्शित्व  और वशित्व यह आठ सिध्दिया होती है | ब्र्हाम्वर्त पुराण के श्री कृष्ण जन्म खण्ड मे यह संख्या 28 बताई गइ है इनके नाम इस प्रकार है.

माँ सिध्दी दात्री भक्तो और साधकों को यह सभी सिध्दिया प्रदान करने मे समर्ध है देवी पुराण के अनुसार भगवन शिव ने इनकी कृपा से ही इन सिध्दियो को प्राप्त किया था इनकी अनुकम्पा से ही भगवन शिव का आधा शारीर देवी का हुआ था इसी कारण वह लोक मे “अर्द्धनारीश्वर ” नाम से प्रसिद्ध हुए |

माँ सिध्दिदात्री चार भुजाओ बलि है इनका वाहन सिंह है यह कमल पुष्प पर भी आसीन रहती है इस्नके दाहिनी तरफ के निचे बाले हाथ मे कमल पुष्प है

नवरात्र पूजन के नॉवे दिन इनकी उपासना की जाती है इस दिन शास्त्रीय विधि –विधान और पूर्ण निष्ठा के साथ साधना करने बाले साधक को सभी सिध्दियो की प्राप्ति हो जाती है इनकी कृपा से स्रष्टि मे कुछ भी उसके लिए अगम्य नहीं रह जाता | ब्रहामन पर पूर्ण विजय प्रप्त करने की सामर्थ्य उसमे आ जाती है |

प्रत्येक मनुष्य का यह कर्तव्य है की वः माँ सोध्दिदात्री की कृपा प्राप्त करने का निरंतर प्रयत्न तथा उसकी आराधना की ओर अग्रसर रहे | इनकी कृपा से निर्लिप्त रहकर सारे सुखो का भोग करता हुआ साधक मोक्ष को प्राप्त कर सकता है |

नवदुर्गाओ मे माँ सिध्दिदात्री अंतिम है अन्य आठ दुर्गाओ की पूजा –उपासना शास्तरीय विधि –विधान के अनुसार करते हुए भक्त दुर्गा –पूजा के नॉवे दिन इनकी उपासना मे प्रवृत होते है सिध्दिदात्री माँ की उपासना पूर्ण कर लेने के बाद भक्तो और साधकों की लोकिक – पारलोकिक दोनों प्रकार की कामनाओ की पूर्ति हो जाती है सिध्दिदात्री माँ की कृपा पात्र के भीतर कोई ऐसी कामना शेष बचती ही नहीं है जिसे वः पूर्ण करना चाहे |