दण्डनायक शनि की विशेषता

महादसा प्राप्त है | यह पुष्य, अनुराधा व उत्तरा भाद्रपद का स्वामी है | शनिदेव को पुष्य नश्रत्र सर्वाधिक प्रिय है | पुष्य को नश्र्त्रों का रजा कहा जाता है |

 शनि का एक राशि में लगभग २ वर्ष 6 माह का गोचर चलता है | एक राशि में सर्वाधिक समय तक गोचर के कारण इसका प्रभाव अधिक रहता है | शनी कि मकर एवं कुंभ 2 रशिया हैं | कुंभ राशि शनि देव को अधिक प्रिय है | तुला राशि मेवं शनि देव उच्च के तथा मेष में नीच के होते हैं | इसके आराध्य देव शिवजी है |

 शनिदेव में विशेष रुचि होने के कारण यह है कि मैं स्वयं शनि की साढेसाती के दो चरण भोग चूका हूं | अतः मैं दो का पद प्राप्त है | शनि वैरागी एवं तपस्वी तथा मेहनत का प्रमुख फल देने वाले हैं | ये मधपान व मांसाहार के सकत विरोधी, सात्विक व सरल प्रवृत्ति के हैं | इन्हें धोका, झूठ, फरेब से सख्त नफरत है तथा सत्य इन्हें अधिक प्रिय है | साढ़ेसाती के दौरान शनि देव जातक की कड़ी परीक्षा लेते हैं | साढ़ेसाती में कष्ट तो भोगना ही पड़ता है, चाहे कुण्डली में उच्च का ही क्यों न हो | पिछले प्रारब्ध्द के अनुसार उच्च का शनि प्राप्त हो जाए तब भी इस जीवन में कोई बिरला ही होता है, जो गलत कार्य न करे या किसी का दिल न दुखए | जाने अनजाने में  प्रत्येक से गलत कार्य हो ही जाते हैं; उन्हीं कार्यों का लेखा-जोखा शनि की साढ़ेसाती है | वर्तमान में शनि सिंह राशि में भ्रमण कर रहे हैं |

 कन्या राशि वालों के लिए सावधान होने का समय है क्योंकि यह उनका प्रथम चरण या चढ़ती साढ़ेसाती है | इस चरण में जातक सर्वाधिक परेशानी का

  • शनि के मंत्र- प्रा प्रीं प्रों नमः का 108 बार प्रतिदिन जाप करें |
  • शनिवार को सरसों के तेल में अपना चेहरा देखकर छायादान करें | एक रुपया का दान रोज करे, हो सके तो 7 शनिवार लोहे की कटोरी गरिबों में दान करे |
  • काले वस्त्र न पहनें |
  • मंगलवार व शनिवार का व्रत करें |
  • किसी गरीब की मृत्यु में जायें और आर्थिक मदद करें |
  • सिद्ध शनि मुद्रिका धारण करें |
  • सरसों के तेल से बने दाल के पकोड़े काले कुत्ते को खिलाये |
  • शनिवार को काले कुत्ते को दही व इमरती खिलायें |
  • गाय को हरी घास खिलायें |
  • मछली को आते कि गोलियां खिलाये |
  • मांस-मंदीरा का तुरंत त्याग कर दें |
  • जुआ सट्टे से दूर रहें |
  • विवादों से दूर राहें |
  • सत्य बोले कोशीश करें झूठ ना बोलना पड़े |
  • विवादों से दूर रहें कम बोले प्रिय बोलें |
  • माता-पिता का आदर करें व उनकी देखभाल करें |
  • बुजुर्गों की सेवा करें |
  • गाय, कुत्ता, कौवा, चींटी को भोग निकाले |
  • अमावस्या के दिन ब्राह्मण को कच्चा दूध दान करें |
  • घर में काले रंग का कुत्ता पालें और उसकी सेवा करे |
  • शनि ग्रह की तांत्रिक विधि से पूजन करायें |
  • घर में पुरानी टूटी वस्तु न रखें |
  • छतरी, कोट, कम्बल, जूते, टार्च, इत्यादि दान करें |
  • शिवजी शनि के अराध्य देव हैं, अतः प्रतेक सोमवार शिवजी का अभिषेक करें |
  • हनुमान जी पर मंगलवार को शुद्ध घी व शनिवार को चमेली के तेल का चोला चढ़ाएं व शाम को दीपक लगाये
  • हनुमान चालीसा का नित्य पाठ करें |
  • बन्धु एवं परिवार के साथ महीने में कम सेकम एक बार शनिवार को सुन्दरकाण्ड के पाठ का आयोजन व प्रसाद का वितरण करें |
  • मंदिर पर लाल रंग का झंडा चढाये |
  • शनिवार को पीपल पर रात को दीपक लगाए |
  • पुष्य नश्रत्र में प्रातः पीपल पर दूध चढ़ाए |
  • चरित्रवन बने |
  • कोई एसा कार्य न करे जिससे किसी का दिल ना दुखे या अकारण उसे कष्ट हो |