उच्च शिक्षा प्राप्ति योग

शिक्षा मनुष्य के विवेक को जागृत करती है | मनुष्य के मस्तिष्क को चैतन्य कर उसके समग्र विकास में सहायक होती है | शिक्षा व्यक्ति को ‘आत्मिक ज्ञान’ प्रदान कर नैतिकता के गुणों से परिपूर्ण करती है | उच्च शिक्षा मनुष्य के अंतःकरण एवं क्रिया में समन्वय कर उत्तरदायित्वों का बोध कराती है |

उच्च शिक्षा प्राप्ति हेतु आवश्यक करक ग्रह-

  1. चन्द्र- चन्द्र मनसो जायते मन के द्वारा ही सभी कार्य साम्भव हैं | चंद्रमा उच्च शिक्षा हेतु महत्वपुर्ण कारक ग्रह है | यदि चन्द्रमा के द्वारा बलारिष्ट योग बन रहा है तो बचपन में कष्ट अवश्यम्भावी है और जब प्रारंभिक शिक्षा कमजोर हुई तो उच्च शिक्षा में बाधा संभाव्य है | चन्द्रमा का बलि होना (उच्च गुरू से दृष्टि या पोर्णिमा का) उच्च शिक्षा में सदा सहायक होता है | ऐसे जातकों का मन भाव्काव नहीं होता, वह एकाग्र होते हैं | उच्च शिक्षा ग्रहण करते है |

 

  1. गुरू- उच्च शिक्षा हेतु महत्वपूर्ण कारक ग्रह है | गुरू यदि कर्क, धनु या मीन राशि में है तो जातक की उच्च शिक्षा होती है | कर्क, धनु या मीन राशि में स्थित गुरू की दृष्टि पंचम ब भाव पर है तो उच्च शिक्षा अवश्य होगी | उच्च के गुरू (कर्क राशिस्थ गुरू) की महादशा या अंतर्दशा में उच्च शिक्षा प्राप्ति योग अवश्य बनता है |

गुरू की बलवान स्थित जन्मपत्री में यह संकेत देती है कि जातक को उच्च कोटि के गुरू का मार्गदर्शन अवश्य प्राप्त होगा जो उसकी उच्च शिक्षा में सहायक होगा |

 

  1. बुध- उच्च शिक्षा में महत्वपूर्ण योगदान बुध का होता है | यह कार्यों व क्रिया कलापों से दूर करता है | उच्च का बुध (कन्या राशिस्थ) व सूर्य के साथ युति वाला बघ उच्च कोटि की बौद्धिक क्षमता स्थापित करता है | लग्न, पंचम या एकादश भाव में स्थित बुध जातक को प्रखर बुद्धि का बनता है | विभिन्न भाषाओं का ज्ञान बुध ही प्रदान करता है |
  2. शनि- वर्तमान में उच्च शिक्षा हेतु अवश्यक कारक ग्रह है | शनि ग्रह ‘मौलिक चिंतन’ विकसित करता है | व्यक्ति को मेहनती बनाता है उश्में जुझारू प्रवृति पैदा करता है | विभिन्न शोध व अनुसंधान इसी ग्रह की देन होती है | यह कार्यों में निरंतरता का धोकत है | उच्च शिक्षा हेतु विदेश गमन इसकी महादशा व अंतर्दशा में प्रायः देखा गया है |
  3. मंगल- उच्च व कतनीकी शिक्षा हेतु मंगल की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है | यह व्यक्ति में धैर्य धारण करने की क्षमता प्रदान करता है | उच्च शिक्षा हेतु आयोजित प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता प्रदान करना मंगल का ही कार्य है | विभिन्न बाधाओं का निवारण करने में अकेला मंगल ही सक्षम है |

उच्च शिक्षा योग (विभिन्न लग्नों में)-

  1. मेष लग्न में पंचम में बुध तथा पंचमेश सूर्य पर गुरू की दृष्टि हो |
  2. मिथुन लग्न में, लग्न में गुरू हो |
  3. कर्क लग्न में, लग्न में बुध, गुरू व शुक्र स्थित हो |
  4. कन्या लग्न में एकादश भाव में गुरू, चन्द्र तथा नवम में बुध स्थित हो |
  5. तुला लग्न में, लग्न में गेरू, पंचम में मंगल, चन्द्र स्थित हो |
  6. धनु लग्न में, लग्न में गुरू, पंचम में मंगल, चंद्र स्थित हो |
  7. वृशिचक लग्न में, लग्न में बुध, सूर्य तथा नवम में गुरू, चन्द्र की युति हो |

उच्च शिक्षा में बाधा-

  1. पंचमेश 6,8,12 में राहु या केतु के साथ हो व उसकी महादशा या  अन्तद्रशा आ जए |
  2. नवमेश अष्टम भाव में हो तथा नवम में पाप ग्रह या नीच राशि का ग्रह हो तो भी उच्च शिक्षा में बाधा आती है |
  3. पंचमेश नवमेश गुरू व गुरू से पंचम भाव का स्वामी निर्बल हो या राहु कतु के प्रभाव में हो तो भी बाधा संभव है |

उपाय- उच्च शिक्षा प्राप्ति हेतु सर्वप्रथम बधाकारक राहु की शांति,पंचमेश व गुरू को बल, अपने गुरुओं का सदैव आदर,माँ सरस्वती की आराधना व विभिन्न ग्रहों से संबंधित उपाय भी अवश्यक है |